देश की मिट्टी हमें प्यारी है अपनी जान से...

आ रही है यह सदा हर खेत से,खलिहान से
देश की मिट्टी हमें प्यारी है अपनी जान से ।
आंख उनकी न बचेगी, बद नज़र डाली अगर
हमको बस इतना है कहना, चीन वो पाकिस्तान से ।
कैसे यह गुलशन उजड़ने देंगे भारत के जवां
जिसको सींचा है बुज़ुर्गों ने बड़े अरमान से ।
एक थे हम,एक हैं हम,एक रहना है हमें
सारी दुनिया से हमें कहना है मिलकर शान से ।
जश्न-ए-आज़ादी मुबारक हो,मगर मत भूलिए
इसकी क़ीमत थी शहीदों ने चुकाई जान से ।
नियाज़ बेशक सारी दुनिया है बहुत प्यारी मगर
जां से ज़्यादा प्यार हम करते हैं हिंदुस्तान से ।
......* नियाज़ कपिलवस्तुवी 

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